चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय (सीएसकेएचपीकेवी), पालमपुर ने जैविक कृषि एवं प्राकृतिक खेती विभाग के तहत भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हमीरपुर जिले के विजहरी और नादौन ब्लॉकों से आए 29 अधिकारियों और किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कुलपति प्रो. नवीन कुमार ने प्राकृतिक खेती अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह पद्धति मिट्टी की उर्वरता को बहाल करने, जैव विविधता को संरक्षित करने और सभी के लिए सुरक्षित खाद्य उत्पादन सुनिश्चित करने में सहायक है। उन्होंने विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता दोहराई कि शिक्षा, शोध और क्षेत्रीय विस्तार के माध्यम से प्राकृतिक और जैविक खेती प्रणालियों को मजबूत किया जाएगा, जिससे किसान पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना लाभ कमा सकें।
कार्यशाला की अध्यक्षता जैविक एवं प्राकृतिक खेती विभाग के अध्यक्ष डॉ. जनार्दन सिंह ने की। उन्होंने रासायनिक पदार्थों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी, जल, वायु और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों पर प्रकाश डाला और कहा कि प्राकृतिक खेती एक दीर्घकालिक और पर्यावरण अनुकूल विकल्प है।
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कृषि विभाग, हमीरपुर के उपनिदेशक डॉ. शशि पाल अत्री ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाओं की जानकारी दी और किसानों से इनका लाभ उठाने का आग्रह किया। आत्मा हमीरपुर के परियोजना निदेशक नितिन कुमार शर्मा ने किसानों को प्राकृतिक पद्धतियां अपनाने के लिए प्रेरित किया और संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग पर जोर दिया।
कार्यशाला का समापन संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें विशेषज्ञों और किसानों ने अनुभव, चुनौतियां और क्षेत्र में सतत कृषि पद्धतियों को मजबूत करने की रणनीतियां साझा कीं
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