भारत में १७ प्रतिशत अधिक हुई गेहूं की खरीद

भारत में १७ प्रतिशत अधिक हुई गेहूं की खरीद

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सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार, सर्कार ने केंद्र को यह जानकारी दी है कि, इस साल गेहू की खरीद १७ प्रतिशत अधिक हुई है। एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में आकड़ों का भी ज़िक्र किया गया है जिसमें पिछले साल की इसी खरीद में ३२४.८१ एलएमटी के मुकाबले ३८२.३५ लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) से अधिक गेहूं की खरीद की गई है।

वहीं दूसरी ओर २०२०-२१ में गेहूं की खरीद सुचारू रूप से मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, के उपार्जन राज्यों सुचारू रूप से जारी है।

रबी विपणन सत्र (आरएमएस) २०२१-२२ में गेहूं की खरीद चालू सीजन खरीफ २०२०-२१ में धान की खरीद २० मई तक ७६०.०६ एलएमटी से अधिक धान (खरीफ फसल ७०५ ६१ एलएमटी और रबी फसल ५४.४५ एलएमटी शामिल) की खरीद के साथ सुचारू रूप से जारी है, जबकि पिछले साल इसी तरह की ७०३ ०९ एलएमटी की खरीद हुई थी।

सरकार ने कहा कि १, ४३,५००.०० करोड़ रुपये के एमएसपी मूल्य के साथ चल रहे खरीफ विपणन सीजन (केएमएस) खरीद कार्यों से लगभग ११३.३० लाख किसान पहले ही लाभान्वित हो चुके हैं।

कुछ राज्यों ने खरीफ विपणन सीजन २०२०-२१ और रबी विपणन सीजन २०२१ के १०७.३७ एलएमटी दलहन और तिलहन की खरीद के लिए मंजूरी का प्रस्ताव सरकार के पास रखा था जिसमें सरकार ने मंजूरी दे दी थी। राज्यों में कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु शामिल है। मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और आंध्र प्रदेश।

आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल राज्यों के लिए १.७४ एलएमटी खोपरा (बारहमासी फसल) की खरीद की मंजूरी भी दी गई। अन्य राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के लिए भी पीएसएस के तहत दलहन, तिलहन और खोपरा की खरीद के प्रस्ताव प्राप्त होने पर स्वीकृति दी जाएगी, ताकि इन फसलों के एफएक्यू ग्रेड की खरीद सीधे वर्ष २०२०-२१ के लिए अधिसूचित एमएसपी पर की जा सके।

केंद्र ने यह भी सूचित किया कि, “२० मई तक, सरकार ने अपनी नोडल एजेंसियों के माध्यम से ६,७६,१०३.५७ मीट्रिक टन मूंग, उड़द, तूर, चना, मसूर, मूंगफली की फली, सरसों के बीज और सोयाबीन की ३,५४१.६७ करोड़ रुपये की एमएसपी मूल्य की खरीद की है, जिससे तमिलनाडु में ४ ,०४ ,२२४ किसानों को लाभ हुआ है। , कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, हरियाणा और राजस्थान खरीफ २०२०-२१ और रबी फसल २०२१ के तहत निर्धारित किया है।”

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