बारिश से हुई फसल के नुकसान से किसानों ने किया बीमा कंपनी से आग्रह

बारिश से हुई फसल के नुकसान से किसानों ने किया बीमा कंपनी से आग्रह

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पिछले दिनों हुई महाराष्ट्र में अत्यधिक बारिश से किसानों की फसलों पर अधिक नुकसान हुआ है जिससे किसानों ने मानसून सीजन में बीमा कंपनीज को जानकारी दी है।

फसल बीमा कंपनीज़ के प्रतिनिधियों को व्यक्तिगत रूप से खेतों में हुए नुकसान का दौरा करने के लिए कहा है, जिसके आधार पर किसानों को बीमा राशि प्रदान की जाएगी।

सूत्रों की जानकारी अनुसार, महाराष्ट्र के किसानों को पिछले महीने २,५६,९८५ किसानों से जानकारी प्राप्त हुई थी, जिसमें भारी बारिश से हुए नुकसान की खबर दी गयी थी। उसके बाद एक से ९ सितम्बर तक किसानों के कॉलों की संख्या लाख से अधिक हो गयी है। यह जानकारी विनयकुमार अवाटे राज्य कृषि आयुक्त के मुख्य सांख्यिकीय अधिकारी ने पीटीआई को बताया।

सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार यह आकड़ां बढ़ सकता है जिसमें डाटा को सिस्टम में जल्द ही अपडेट कर दिया जाएगा।

इसके अलावा भारी बारिश से फसल को नुकसान पहुंचा है बल्कि, पशुशाला को हुए नुकसान, किसानों के खेत की मिट्टी बह जाने के बारे में भी ज़िक्र किया है।

पिछले सप्ताह राज्य के मराठवाड़ा क्षेत्र में भारी बारिश से कॉल्स की संख्या बढ़ गयी है।

अधिकारी ने कॉल्स का जवाब देते हुए कहा कि, ‘हमने पिछले हफ्ते केंद्र सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक की और इस मुद्दे पर चर्चा की। केंद्र सरकार ने मराठवाड़ा क्षेत्र और उत्तरी महाराष्ट्र में अत्यधिक बारिश के मद्देनजर ऐसी अधिक संख्या में कॉल स्वीकार करने में हमारी मदद करने के लिए अपने तकनीकी समर्थन में वृद्धि की है।”

किसानों की इस तरह की संख्या बढ़ने से फ़ोन लाइन बंद हो सकती है या फिर सर्वर डाउन की प्रॉब्लम हो सकती है।

केंद्र सरकार ने इन मुद्दों पर राज्य सरकार की मदद की है और अन्य विकल्पों पर हल बताया है। किसान को हुए नुकसान में बीमा कंपनीज़ में नाम दर्ज करवा सकते हैं।

फसल बीमा योजना के तहत, बीमाकर्ताओं के लिए यह आवश्यक है कि वे किसानों की हर कॉल्स का रिकॉर्ड दर्ज करें।

किसान खेत में हुए नुकसान से फसल बीमा कंपनी द्वारा दिए गए नंबर पर कॉल कर सकते है, ईमेल भेज सकते हैं, या फिर स्थानीय राजस्व अधिकारी को फोन करके जानकारी दे सकते हैं। किसान आसपास के बैंक शाखा में भी सूचित कर सकते हैं।

किसान को बीमा कंपनी में फसल ख़राब होने के ७२ घंटों के भीतर कॉल करना होगा। नुकसान की जानकारी के लिए एक एप भी उपलब्ध है।

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