गेहूं की मालवीय ८३८ किस्म है काफी उपयोगी

गेहूं की मालवीय ८३८ किस्म है काफी उपयोगी

हाल ही में, केंद्र सरकार ने कुपोषण और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए फसलों की ३५ किस्मों को शामिल किया है। कृषि विज्ञान संस्था तथा बीएचयू में विकसित गेहूं की मालवीय ८३८ किस्म को शामिल किया है।

गेहूं की इस किस्म की सरहाना करते हुए इसकी खासियत बताई जिसमें ११ प्रतिशत प्रोटीन, ४० से ४५ पीपीएम आयरन तथा ५० पीपीएम की मात्रा दर्ज की है।

मालवीय ८३८ नाम की गेहूं की किस्म को ज़्यादा उपज मिलने की उम्मीद

इस गेहूं का उत्पादन सामान्य गेहूं से कम पानी में प्रति हेक्टेयर से ज्यादा ही मिलेगा। इस गेहूं की किस्म का अध्ययन लगभग ४ साल तक भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान-करनाल द्वारा किया गया जबकि इसकी खोज २०१४ में की जा चुकी थी। इसके आलावा कुछ जिलों जबलपुर,अयोध्या, मोहन नगर, मेरठ, नई दिल्ली, वाराणसी, कुंच बिहार, कानपुर,सहित ५० कृषि विश्वविद्यालयों, केंद्रों में भी उपज का परीक्षण जारी रहा।

माना गया है कि, बांग्लादेश में ब्लास्ट को रोकने में उपयोगी

हाल ही में वैज्ञानिकों ने मालवीय ८३८ किस्म वाले गेहूं को विकसित कर बांग्लादेश में बीमारी ब्लास्ट को काफी हद तक नियंत्रण किया जा चुका है। यह रोग आसानी से हवा में भी फ़ैल जाता है।

गेहूं मालवीय ८३८ किस्म बेहद उपयोगी पायी गयी गयी है, जिसका कोई प्रभाव नहीं होता और यह पूर्ण रूप से प्रतिरोधी है इस किस्म की फसल को बांग्लादेश से सटे भारत के राज्यों में उगाया जाता है, जिससे इसको भारत में आने से रोका जा सकता है।

मालवीय ८३८ किस्म है काफी उपयोगी

गेहूं मालवीय ८३८ जिंक की पूर्ती कर सकता है। जिंक से ही लगभग २०० पोषक तत्व शरीर में बनते हैं जो शारीरिक विकास एवं मानसिक विकास के लिए सहायक होता है। जिंक की कमी होने से बच्चों में खासकर हैजा एवं डायरिया की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में गेहूं की इस किस्म को काफी प्रभावी माना जा रहा है।

गेहूं की इस नयी किस्म में ४५ से ५० पीपीएम तक जिंक की मात्रा पायी गयी है, जबकि आयरन की मात्रा ३०-३५ पीपीएम व सामान्य गेहूं में २५ से ३० पीपीएम होती है।

प्रशिक्षण के दौरान करीब ४५ क्विंटल प्रति हेक्टेयर से अधिक मालवीय ८३८ की उपज अर्जित की गयी है।

जिंक युक्त किस्म का प्रशिक्षण विभिन्न संस्थानों द्वारा किया गया है इसमें अंतरराष्ट्रीय गेहूं एवं मक्का अनुसंधान भी शामिल है।