एआई और पारंपरिक किसानों ने के बिच अनोखी प्रतियोगिता

एआई और पारंपरिक किसानों ने के बिच अनोखी प्रतियोगिता

68

भारत देश में खेती करने के कई नए विकसित तकनीकी खोजे जा रही है। हाल ही मे एक स्पर्धा का आयोजन किया ता क्योंकि कृषि क्षेत्र में चौथी औद्योगिक क्रांति को हुयी है। जब चीन में किसानों ने मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित तकनीक के साथ फल उगाने की प्रतिस्पर्धा की, तो मशीनों ने कुछ अंतर से जीत हासिल की।

डेटा वैज्ञानिकों ने पारंपरिक किसानों की तुलना में वजन के आधार पर १९६ प्रतिशत अधिक स्ट्रॉबेरी का उत्पादन किया। पहली टीम में स्ट्रॉबेरी की परंपरागत खेती करने वाले किसान थे तो दूसरी टीम में थे जो आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) तकनीक अपनाकर खेती करने वाले किसान थे।

एआई खेती करने के लिए आधुनिक और उन्नत तकनीक शामिल है जिसमें मशीनों का उपयोग किया जाता है. और यह प्रतियोगिता करीब चार महीनों तक चली। जिसमें परंपरागत किसानों को हार का सामना करना पड़ा।

tractor news

यह प्रतियोगिता यूनाइटेड स्टेट के खाद्य और कृषि संगठन ने आयोजित की थी। एआई जैसी आधुनिक तकनीक अपनाकर स्ट्रॉबेरी की खेती की उन्हें १९६ प्रतिशत अधिक उत्पादन हुआ. वहीं पारम्पारिक खेती में लागत से ७५ प्रतिशत की अधिक आमदानी हुई।

आयोजकों ने कहा कि “प्रतियोगिता में, प्रौद्योगिकी टीमों को ग्रीनहाउस स्वचालन के माध्यम से तापमान और आर्द्रता को नियंत्रित करने में सक्षम होने का लाभ था। तकनीक जैसे बुद्धिमान सेंसर का उपयोग करना, वे पानी और पोषक तत्वों के उपयोग को नियंत्रित करने में अधिक सटीक थे।

पारंपरिक किसानों को हाथ और अनुभव द्वारा समान कार्य प्राप्त करने थे। एक्सेंचर और फ्रंटियर इकोनॉमिक्स के विश्लेषण के अनुसार, २०३५ तक, विकसित देशों में श्रम उत्पादकता एआई के प्रभाव के कारण ४० प्रतिशत तक बढ़ सकती है।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की अपनी भविष्य की रिपोर्ट २०२० में, विश्व आर्थिक मंच का अनुमान है कि २०२५ तक, मनुष्यों और मशीनों के बीच श्रम विभाजन में ८५ मिलियन नौकरियों को विस्थापित किया जा सकता है, जबकि ९७ मिलियन नई भूमिकाएं उभर सकती हैं जो नए के लिए अधिक अनुकूलित हैं मनुष्यों, मशीनों और एल्गोरिदम के बीच श्रम का विभाजन है।

agri news

Leave a Reply