मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत में अचानक फैली घनी कोहरे और धुंध का मुख्य कारण हिमालय क्षेत्र में सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस है। इसके चलते हवा की दिशा पश्चिम से पूर्व की ओर बदल गई है, जिसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान और पंजाब में इकट्ठा हुआ प्रदूषण अब दिल्ली की ओर बढ़ रहा है।
दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में मौसम में अचानक बदलाव आया है, जबकि उत्तर प्रदेश से लेकर पंजाब और हरियाणा तक सुबह के समय धुंध छाई हुई है। इस दौरान हवा की गुणवत्ता भी बेहद खराब श्रेणी में बनी हुई है। दिल्ली में बीती रात 11 बजे एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 316 था, जो आज सुबह 7 बजे करीब 349 तक पहुंच गया है। दिल्ली के अलावा, चंडीगढ़, सोनीपत और अमृतसर में भी हवा की गुणवत्ता बहुत खराब बनी हुई है।
फॉग और स्मॉग के कारण दृश्यता (विजिबिलिटी) भी बहुत कम हो गई है। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुबह 6 बजे विजिबिलिटी केवल 100 मीटर थी, जबकि हिंडन एयरपोर्ट और अमृतसर एयरपोर्ट पर जीरो विजिबिलिटी दर्ज की गई है। उत्तर भारत में मौसम में यह बदलाव और घना कोहरा कई पर्यावरणीय कारणों और मौसमी गतिविधियों का परिणाम हो सकता है।
धुंध के पीछे का कारण क्या है?
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत में घने कोहरे और धुंध के छाने का मुख्य कारण हिमालय क्षेत्र में सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस है। इस कारण हवा की दिशा पश्चिम से पूर्व की ओर बदल गई है, जिससे पाकिस्तान और पंजाब में जमा प्रदूषण दिल्ली की ओर बढ़ गया है। जब धूल और धुएं का मिश्रण होता है और तापमान में गिरावट आती है, तो आस-पास की आर्द्रता इकट्ठा होकर धुंध या कोहरे का रूप ले लेती है।
कोहरा और स्मॉग में अंतर क्या है?
कोहरा और स्मॉग दोनों ही आसमान में धुंध जैसी स्थिति उत्पन्न करते हैं, लेकिन इनमें कुछ प्रमुख अंतर होते हैं। कोहरा तब बनता है जब हवा में बहुत छोटी पानी की बूंदें एकत्रित होती हैं, जो कि ठंडे वातावरण में तैरती हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसे न्यूक्लिआइजेशन कहा जाता है, जिसमें धूल और धुएं के कणों पर पानी की बूंदें जमा होकर कोहरे का रूप लेती हैं।
वहीं, स्मॉग एक मिश्रित स्थिति होती है, जिसमें प्रदूषण और धुएं का योगदान होता है। यह तब बनता है जब प्रदूषण की अधिकता होती है, विशेषकर तापमान गिरने और हवा की दिशा में बदलाव के कारण। कोहरा आमतौर पर सफेद रंग का होता है, जबकि स्मॉग का रंग हल्का ग्रे या भूरा हो सकता है। इसलिए, जबकि कोहरा प्राकृतिक रूप से ठंडे मौसम और उच्च आर्द्रता के कारण बनता है, स्मॉग प्रदूषण के कारण और विशेष मौसम परिस्थितियों में उत्पन्न होता है।
पहाड़ों से ठंडी हवाओं के कारण सर्दी में होगी बढ़ोतरी
पहाड़ों पर सीजन की पहली बर्फबारी के बाद, अब दिल्ली में सर्दी बढ़ने की संभावना है। वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के प्रभाव से पहाड़ों से आ रही ठंडी हवाएं दिल्ली तक पहुंच सकती हैं, जिससे 18 नवंबर के बाद तापमान में गिरावट आ सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, 14 से 16 नवंबर के बीच दिल्ली में अधिकतम तापमान 32 डिग्री और न्यूनतम तापमान 16-17 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है। इसके बाद, हवाओं के प्रभाव से दिन के तापमान में कमी देखी जा सकती है।
17 नवंबर को अधिकतम तापमान 31 डिग्री और न्यूनतम तापमान 16 डिग्री रहने की संभावना है, वहीं 18 नवंबर को यह 30 डिग्री अधिकतम और 15 डिग्री न्यूनतम तक गिर सकता है। 14 से 18 नवंबर तक दिल्ली में स्मॉग और कोहरे की स्थिति बनी रह सकती है। इसके बाद, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में पहाड़ों की ठंडी हवाएं पहुंचने के कारण तापमान में गिरावट देखने को मिलेगी।
दिल्ली में ठंड के मौसम का आगमन मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिमी हवाओं पर निर्भर करता है, जिन्हें वेस्टर्न डिस्टर्बेंस कहा जाता है। इस साल इन हवाओं की गति धीमी रहने के कारण सर्दी का मौसम देर से आ सकता है। वेस्टर्न डिस्टर्बेंस हिमालय क्षेत्र में बर्फबारी और बारिश का कारण बनते हैं, जो उत्तर भारत में ठंड का माहौल उत्पन्न करते हैं। इस बार नवंबर में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से 3-4 डिग्री अधिक रिकॉर्ड किया गया है।
