इस वर्ष उत्तर महाराष्ट्र के धुले, नंदुरबार और जलगाँव जिलों में चने की खेती के क्षेत्र में वृद्धि हुई है। वर्तमान में चना फसल के लिए भी वातावरण अनुकूल है। इससे प्रति एकड़ पांच से सात क्विंटल चना की रिकॉर्ड पैदावार हो रही है। चने का बाजार मूल्य 7 हजार से 12 हजार रुपये तक होने से किसान संतुष्ट हैं। इस बीच किसान उम्मीद जता रहे हैं कि बाजार में चने की आवक बढ़ने के बाद भी भाव जस के तस बने रहें।
रबी सीजन में अकेले नंदुरबार जिले में 30 हजार हेक्टर से अधिक में चने की फसल बोई जा चुकी है। इस वर्ष चना फसल के लिए अनुकूल वातावरण है। इस वजह से प्रति एकड़ पांच से सात क्विंटल चने की रिकॉर्ड पैदावार हुई है।
खरीफ सीजन में तेज बारिश और बेमौसम बारिश से किसानों की फसलें चौपट हो गईं। खड़ी फसल बर्बाद हो गई। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि अब रबी सीजन चना की फसल के लिए अनुकूल है। इससे किसानों को चना की रिकॉर्ड फसल मिल रही है।
प्रति एकड़ पांच से सात क्विंटल रिकॉर्ड उत्पादन होने की संभावना है। चने की फसल के लिए प्रति एकड़ सात हजार रुपए तक का खर्चा आता है। उत्पादन अच्छा होने से किसानों को फायदा हो रहा है। ग्रेड के हिसाब से चने की कीमत 7 हजार से 12 हजार रुपये तक मिल रही है। रुपये का उत्पादन होने पर किसानों ने संतोष व्यक्त किया है।
हालांकि इस साल रबी सीजन की फसलों का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है, लेकिन किसानों ने उम्मीद जताई है कि मार्केट कमेटी में बढ़ोतरी के बाद चने की फसल के भाव में गिरावट नहीं होनी चाहिए। इस बीच चने की फसल का अच्छा दाम मिलने से किसान संतुष्ट हैं। लेकिन क्या यह रेट काम करेगा ऐसा सवाल उठाया जा रहा है।
हिंगोली जिले के ग्राम किसान संकट में हैं। अभी तक नेफेड केंद्रों पर चना खरीदी के लिए पंजीयन की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। इससे किसान मायूस हो गए हैं। नैफेड द्वारा चने की खरीद के लिए हिंगोली में प्रतिवर्ष गारंटीकृत मूल्य क्रय केन्द्र प्रारंभ किए जाते हैं। लेकिन अभी तक कोई हलचल नहीं है।
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