भारत और फिजी गणराज्य के कृषि मंत्रालय के बीच हुआ एमओयू पर समझौता

भारत और फिजी गणराज्य के कृषि मंत्रालय के बीच हुआ एमओयू पर समझौता

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हाल ही में मिली जानकारी के अनुसार, सरकार ने कृषि क्षेत्र में और अन्य एमओयू फाइटोसैनेटिक मुद्दों से निपटने के लिए फिजी और भारत इंडो-फिजी वर्किंग ग्रुप की स्थापना की और एमओयू के समझौते को मंजूरी मिली है ।

समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने की मंजूरी भारत सरकार के कृषि मंत्रालय और फिजी गणराज्य के कृषि मंत्रालय के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में की गयी है ।

विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के लिए भारत और फिजी के बीच समझौता ज्ञापन हुआ है साथ ही दोनों देशों के निजी क्षेत्रों के बीच संयुक्त उद्यमों को बढ़ावा देना शामिल है।

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दोनों देशो के बीच हुए समझौते में शामिल कुछ पहलुओं को रखा गया है जैसे वैज्ञानिक विशेषज्ञों, समझौता अनुसंधान कर्मियों, तकनीकी प्रशिक्षुओं के आदान-प्रदानकृषि विकास के लिए बुनियादी ढांचे का विकास; सेमिनार और कार्यशालाएं आयोजित करके अधिकारियों और किसानों के प्रशिक्षण के माध्यम से मानव संसाधनों का विकास आदि शामिल किया गया है।

दोनों देशों के बीच एक साथ काम करने का मुख्य उद्देश्य कृषि वस्तुओं के मूल्य संवर्धन / डाउनस्ट्रीम प्रसंस्करण और विपणन में निवेश को बढ़ावा देना है।

भारत और फ़िजी के कृषि मंत्रालय कृषि के सभी क्षेत्रों में क्षमता विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ बाजार तक पहुँच के माध्यम से कृषि उत्पादों का प्रत्यक्ष व्यापार भी करेंगे। “वे अनुसंधान प्रस्तावों और अनुसंधान परियोजनाओं और कार्यक्रमों के निष्पादन की संयुक्त योजना और विकास भी करेंगे।”

दोनों देशों के कृषि मंत्रालय का मकसद कृषि उत्पादों का प्रत्यक्ष व्यापार करना और कृषि के सभी क्षेत्रों में क्षमता विकास को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने अनुसंधान प्रस्तावों के विकास और अनुसंधान परियोजनाओं और कार्यक्रमों के निष्पादन पर एक योजना तैयार की है।

ऑफिशल स्टेटमेंट में कहा गया है कि,”एमओयू के तहत, एक संयुक्त कार्यकारी समूह (JWG) का गठन प्रक्रियाओं और योजनाओं को निर्धारित करने और दोनों देशों की क्रियान्वयन एजेंसियों के माध्यम से अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सहयोग के कार्यक्रमों की योजना बनाने के लिए किया जाएगा।”

हर दो साल में एक बार, कार्यदल भारत और फिजी में बारी-बारी से बैठक करेगा।

सरकार का कहना है कि समझौता ज्ञापन अपने हस्ताक्षर की तारीख से प्रभावी होगा और पांच साल की अवधि के लिए लागू रहेगा।

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