हाल ही में, आईसीऐआर ने कृषि के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर दवा एवं उर्वरा का छिड़काव कर सकेंगे। ड्रोन का सही प्रयोग का निरिक्षण करने एपीआरआरआई-मारुटेरु के एसोसिएट डायरेक्टर ऑफ रिसर्च डॉ जी जोगी नायडू, कृषि विश्वविद्यालय बोर्ड के सदस्य पचरी देवुल्लू द्वारा पूर्ण किया गया।
ड्रोन का इस्तेमाल झारखण्ड के रामगढ़ जिले के किसानों को खेती में विभिन्न व्यावसायिक फसलों पर लागत को कम करने के लिए श्रम की कमी से बचने के लिए प्रौद्योगिकी को अपनाने की व्यवहार्यता के लिए कृषि अनुसंधान स्टेशन, पेदापुरम द्वारा ड्रोन प्रौद्योगिकी प्रदर्शन आयोजित किया गया है।
श्री देवुल्लू ने किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि, “ड्रोन तकनीक की व्यवहार्यता आंध्र प्रदेश में कृषि में पहले ही साबित हो चुकी है। उम्मीद है कि इसकी क्षमताओं और विशेषताओं को देखते हुए आने वाले वर्षों में इस तकनीक को और अधिक किसानों द्वारा अपनाए जाने की संभावना है।
ड्रोन का उपयोग जिले के एक किसान द्वारा दिए गए प्रदर्शन में बाजरे और मक्का के खेतों में कीटनाशक का छिड़काव किया गया है। एक एकड़ खेत को १५ मिनट के भीतर कीटनाशक का छिड़काव करने के लिए किया जा सकता है और अधिकतम शुल्क रूपए ३५० प्रति एकड़ है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने अनुसूचित जाति उप-योजना के तहत आरएआरएस-पेद्दापुरम के वैज्ञानिकों ने मक्का किसानों को किट वितरित किए हैं। इसके साथ प्रत्येक किट में तिरपाल, स्प्रेयर मशीन, और ६००० रूपए के अन्य उपकरण शामिल हैं।
“मक्का पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के हिस्से के रूप में आरएआरएस-पेद्दापुरम में मक्का पर अनुसंधान प्रगति पर है”, सुश्री अनुराधा ने कहा। पूर्वी गोदावरी और पश्चिम गोदावरी जिले आंध्र प्रदेश में प्रमुख मक्का उत्पादक हैं।
ड्रोन की मदद से कीटनाशक छिड़काव पर सैकड़ों एकड़ पर छिड़काव अधिक मात्रा में किया जा सकता है जिसमें कम समय और लागत की भी बचत होती है।