भारत देश कृषि प्रधान देश हैं यहाँ पर विभिन्न प्रकार की गेहूं की खेती की जाती हैं इनमें मुख्य राज्य हरयाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। गेहूं की बुवाई के लिए खरीफ सीजन २०२१ के लिए देश के किसान जोरो शोरों से तैयारियों में लगे हैं। यह सीजन जमीन तथा मिटटी में पर्याप्त नमी होने से गेहूं की बुवाई में उपज अच्छी पायी जाती हैं तथा उपज ज़्यादा से ज़्यादा होती हैं।
गेहूं की पांच किस्में जिनमें किसानों को अधिक पैदावार मिलेगी तथा उन्नत किस्मों से कीट पतंगों का भी खतरा काम होगा।
डीबीडब्लू-१८७ (करण वंदना)
डीबीडब्लू-१८७ को करण वंदना के नाम से भी जाना जाता है। गेहूं की यह किस्म लगभग १४८ दिन में पककर तैयार हो जाती है। गेहूं की यह किस्म बुवाई के लिए एक हेक्टेयर के खेत में ६१ से लेकर ८० क्विंटल पैदावार उत्पन्न कर सकती है। जो आम फसल से ३० से ३५ फीसदी अधिक है । इस किस्म के गेहूं में लूड स्मट और करनाल बंट से बचने की भी क्षमता होती है। इस किस्म को जौ अनुसंधान केंद्र और करनाल के गेहूं ने विकसित किया है। गंगा तराई क्षेत्र में बुवाई के लिए यह किस्म बेहतर लाभदायी मानी गयी है ।
डीबीडब्ल्यू-२२२
डीबीडब्ल्यू-२२२ को करण नरेंद्र के नाम से भी जाना जाता है। एक हेक्टेयर जमीन पर इस किस्म की गेहूं की खेती जमीन पर ६१ .३ क्विंटल तक की जा सकती है। तथा बेहतर परिस्थितियों में इसकी पैदावार ८२.१ क्विंटल तक की जा सकती है। यह किस्म जलभराव की परिस्थिति से निपटने में बेहतर होती है। डीबीडब्ल्यू-२२२ की फसल १४३ दिन में तैयार की जा सकती है।
डीबीडब्ल्यू-२५२
डीबीडब्ल्यू २५२ को करण श्रिया के नाम से भी जाना जाता है। यह किस्म की फसल १२५ से १३० दिनों में तैयार की जा सकती है। तथा १०० दानों का भार ४४ से ४६ ग्राम होता है। इस किस्म की पैदावार प्रति हेक्टेयर ५६ क्विंटल तक होती है।
डीबीडब्ल्यू ४७
डीबीडब्ल्यू ४७ की इस किस्म के गेहूं में प्रोटीन की मात्रा अधिक पायी जाती है। प्रति हेक्टेयर के माध्यम से इस किस्म में पैदावार ७४ क्विंटल तक होती है । पोषण के लिए यह किस्म फायदेमंद है।
डीबीडब्ल्यू-१८७
डीबीडब्ल्यू-१८७ का यह किस्म करण वंदना का दूसरा रूप माना गया है। इस किस्म का गेहूं खेतों में १२० दिन में पककर तैयार किया जा सकता है। तथा एक हेक्टेयर खेत में ४९-६५ क्विंटल तक पैदावार आसानी से मिलती है। इस किस्म की खेती एमपी, बिहार, यूपी जैसे राज्यों में की जाती है। इसमें ११.६ फीसदी तक प्रोटीन की मात्रा होती है।
यदि किसानों ने कर ली सही समय पर गेहूं की बुवाई तो होगा लाभ में उत्पादन
भारत राज्य के उत्तर पश्चिम में गेहूं की बुवाई नवंबर माह में बेहतर मानी जाती है। ऐसे में यदि किसान गेहूं की फसल को बोकर लाभ लेना चाहते हैं तो सही समय पर बुवाई करें जिससे पैदावार अच्छी होती है।