पंजाब में हाल ही में आई बाढ़ से व्यापक नुकसान को देखते हुए, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) ने किसानों को फसल हानि कम करने और पानी घटने के बाद उत्पादन बहाल करने के लिए एक विस्तृत परामर्श जारी किया है। विश्वविद्यालय ने विभिन्न फसलों के लिए विशेष सुझाव दिए हैं ताकि किसान अपनी आजीविका सुरक्षित रख सकें।
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धान और बासमती की फसलें सबसे अधिक जोखिम में
धान विशेषज्ञ डॉ. बुटा सिंह ढिल्लों ने बताया कि अधिकांश धान की किस्मों में डूबाव सहनशीलता नहीं होती। उन्होंने कहा, “अगर फसल चार से पाँच दिन से अधिक समय तक ठहरे हुए पानी में रहती है, तो नुकसान शुरू हो जाता है और कई मामलों में फसल सड़ भी सकती है।”
पंजाब में लगभग 32.49 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान और 6.81 लाख हेक्टेयर में बासमती की खेती होती है। इन फसलों के लिए PAU ने किसानों को तुरंत पंपों की मदद से खेतों से पानी निकालने की सलाह दी है ताकि जड़ों को ऑक्सीजन मिल सके।
सलाह में पोषक तत्वों की कमी और रोगों से बचाव के लिए विशेष उपाय सुझाए गए हैं:
- नाइट्रोजन की कमी: निचली पत्तियों का पीला होना इसका शुरुआती संकेत है। ऐसे में 3% यूरिया घोल का छिड़काव करें।
- बांझपन की रोकथाम: बूट अवस्था के दौरान बांझपन से बचाने के लिए 1.5% पोटैशियम नाइट्रेट का छिड़काव करें।
- रोग प्रबंधन: फाल्स स्मट से बचाव हेतु बूट अवस्था में 500 ग्राम कोसाइड फफूंदनाशक का छिड़काव करें और 10–15 दिन बाद 400 मिली गैलीलियो वे फफूंदनाशक का छिड़काव करें।
- जिंक की कमी: पत्तियों पर भूरे धब्बे जिंक की कमी का संकेत हो सकते हैं। इसे दूर करने के लिए 0.5% जिंक सल्फेट का छिड़काव करें।
मक्का, ज्वार और बाजरा के लिए दिशा-निर्देश
मक्का, ज्वार और बाजरे के लिए विश्वविद्यालय ने खेतों से ठहरा हुआ पानी तुरंत निकालने पर जोर दिया। किसानों को फसल की स्थिति देखकर कार्यवाही करने की सलाह दी गई है:
- मध्यम नुकसान: सप्ताह के अंतराल पर दो बार 3% यूरिया घोल का छिड़काव करें।
- गंभीर नुकसान: बेहतर सुधार के लिए यूरिया की मात्रा दोगुनी करें।
सलाह में यह भी कहा गया है कि लंबे समय तक पानी में डूबने से तने सड़ सकते हैं, इसलिए बुरी तरह प्रभावित पौधों को उखाड़ना आवश्यक है।
ज्वार और बाजरे की फसलों में बाढ़ से कोई बड़ा खतरा नहीं होता। हालांकि, अगर पत्तियां पीली पड़ रही हों तो 3% यूरिया का छिड़काव करना चाहिए।
कपास प्रबंधन उपाय
कपास की फसल भी बाढ़ से प्रभावित हो सकती है। पौधों को पैरा वील्ट से बचाने के लिए 10 मिलीग्राम कोबाल्ट क्लोराइड को एक लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, 2% पोटैशियम नाइट्रेट के चार छिड़काव सप्ताह के अंतराल पर करने की सलाह दी गई है।
साथ ही, कपास की फसल में गुलाबी सुंडी के प्रकोप पर लगातार निगरानी रखने की आवश्यकता है। यदि नुकसान 5% से अधिक हो, तो अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग करें।
फलों और बागवानी फसलें
फल किसानों को पेड़ों की जाँच करने की सलाह दी गई है, जिसमें उखड़ना, टहनियों का टूटना, तनों का झुकना और जड़ों के आसपास मलबे का जमाव शामिल है। विश्वविद्यालय ने क्षतिग्रस्त शाखाओं की कटाई, जल निकासी की व्यवस्था और खाद डालने की सलाह दी है।
PAU ने कहा कि “बाढ़ पोषक तत्वों से भरपूर मिट्टी की ऊपरी परत को बहा ले जाती है।” इसलिए किसानों को नाइट्रोजन और पोटैशियम उर्वरकों का छिड़काव करने की सलाह दी गई है ताकि पौधों की वृद्धि बहाल हो सके और दीर्घकालिक नुकसान से बचा जा सके।
किसानों के लिए सहारा
बाढ़ से हुए कृषि नुकसान को देखते हुए यह सलाह किसानों के लिए समय पर जारी की गई है। धान, कपास, मक्का और फलों पर आधारित पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए PAU की वैज्ञानिक सिफारिशें अहम साबित हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपायों को अपनाकर किसान अपनी फसलों को और अधिक नुकसान से बचा सकते हैं और आने वाले सीजन के लिए खेत तैयार कर सकते हैं। विश्वविद्यालय ने किसानों से परामर्श को गंभीरता से अपनाने और अतिरिक्त तकनीकी मदद के लिए स्थानीय कृषि विस्तार अधिकारियों से संपर्क करने की अपील की है।
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