महाराष्ट्र के कृषि मंत्री धनंजय मुंडे ने बताया कि खरीफ सीजन में जून और जुलाई महीनों में यूरिया और डीएपी उर्वरकों की आपूर्ति कम होने की संभावना है। इसलिए, इस संभावित कमी से बचाव के लिए राज्य सरकार को स्टॉक रिजर्व में रखने का निर्णय लेना चाहिए। यह सुनिश्चित करेगा कि खाद की कमी के मामले में इसका उपयोग किया जा सके।
धनंजय मुंडे ने बताया कि खरीफ सीजन के जून और जुलाई महीनों में यूरिया और डीएपी उर्वरकों की आपूर्ति कम होने की संभावना है। इसलिए, संभावित कमी से बचाव के लिए स्टॉक को रिजर्व में रखने का सुझाव दिया गया है। इस कार्य के लिए, लगभग डेढ़ लाख मीट्रिक टन यूरिया और 0.25 लाख मीट्रिक टन डीएपी खाद के संरक्षित स्टॉक बनाए रखना चाहिए। इसके लिए खाद के भंडारण, परिवहन, बीमा, खाद की हैंडलिंग, जीएसटी सेवा शुल्क और अन्य आकस्मिक खर्चों के लिए नोडल एजेंसियों को धन मिलेगा।
यूरिया और डीएपी के संबंध में अधिकांश राज्यों में अक्सर कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं, और महाराष्ट्र इसमें अलग नहीं है। इसलिए, कृषि मंत्री धनंजय मुंडे ने सुझाव दिया है कि राज्य में यूरिया और डीएपी का रिजर्व भंडार बनाए रखा जाना चाहिए, ताकि खरीफ अवधि के दौरान उर्वरकों की कमी न हो। मुंडे ने 2024 के खरीफ सीजन में इसे सुनिश्चित करने के लिए एक बैठक का आयोजन किया, जिसमें अधिकारियों को संबोधित किया गया।
मिट्टी की जाँच के सुझाव दिए जा रहे हैं:
खेत में 17 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, लेकिन किसान अक्सर यूरिया और डीएपी का ही उपयोग करते हैं। अधिक नाइट्रोजन और फॉस्फोरस का उपयोग मिट्टी की उर्वरता को कम कर सकता है। इसलिए, किसानों को अब मिट्टी की जाँच करवाने का सुझाव दिया जा रहा है। खेत में उस पोषक तत्व की कमी को भरने के लिए जिसे ज़्यादा आवश्यकता है, उसका ही इस्तेमाल करें। इससे यूरिया और डीएपी की खपत कम होगी। लेकिन दोनों खादों की खपत कम नहीं हो रही है, इसलिए इन दोनों की रिजर्व स्टॉक बनाए जा रहे हैं।
स्टॉक की सुरक्षा के लिए निर्देश :
कृषि मंत्री मुंडे ने भी आदेश दिया है कि महाराष्ट्र कृषि उद्योग विकास निगम, महाराष्ट्र राज्य सहकारी विपणन महासंघ, और विदर्भ सहकारी विपणन महासंघ को स्टॉक की सुरक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए। सह्याद्री गेस्ट हाउस में हुई बैठक में कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुप कुमार, कृषि आयुक्त प्रवीण गेदाम, विदर्भ मार्केटिंग फेडरेशन के अरुण दलाल, महाराष्ट्र कृषि एवं उद्योग विकास निगम के महेंद्र बोरसे सहित कई अधिकारी मौजूद थे। राज्य सरकार ने नैनो यूरिया और डीएपी को बढ़ावा देने की भी योजना बनाई है।

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