किसानों के लिए उर्वरक से जुड़ी नयी खबर मिल सकती हैं। भारत सरकार ने साल २०२१-२२ में को उर्वरक सब्सिडी को १.५५ ट्रिलियन रूपए से अधिक के रिकॉर्ड को बढ़ाने के लिए योजना निर्धारित की हैं। ताकि रासायनिकों की वैश्विक कीमतों में तेज़ वृद्धि के बीच कमी से बचा जा सके। वर्तमान वित्त वर्ष वर्ष के बजट में उर्वरक सब्सिडी के लिए दी गयी राशि से दोगुना हैं।
फर्टिलाइज़र्स सब्सिडी ६२ प्रतिशत तक बढ़ाने की उम्मीद
सूत्रों से मिली जानकर अनुसार, यह अन्यमान लगाया गया है कि कम मांग कि बावजूद कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के कारण केंद्र का उर्वरक सब्सिडी बिल वित्त वर्ष में ६२ प्रतिशत बढ़कर करीब १.५ लाख करोड़ रुपये हो जानें की संभावना हैं।
भारत यूरिया का प्रमुख आयातक स्त्रोत हैं
भारत, यूरिया का शीर्ष आयातक है और डायमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) का एक प्रमुख खरीदार भी है, जो देश के लगभग ६० प्रतिशत कर्मचारियों को रोजगार देता है और २.७ ट्रिलियन डॉलर का १५ प्रतिशत अर्थव्यवस्था का भाग हैं।
सरकार विभिन्न फ़र्टिलाइज़र कंपनीज को वित्तीय सहायता प्रदान करती है जो बाजार से नीचे की दरों पर उर्वरक बेचती हैं इनमे शामिल मद्रास फर्टिलाइजर लिमिटेड, चम्बल फर्टिलर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड, कंपनीज़ भी शामिल हैं।
फसल के पोषक तत्व का उत्पादन करने के लिए दो स्त्रोत सबसे एहम हैं प्राकृतिक गैस एवं कोयला। पिछले वर्ष की तुलना में रूस और चीन द्वारा उर्वरकों पर नए निर्यात प्रतिबंधों के बाद वैश्विक उर्वरक की कीमतों में लगभग २०० प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की हैं।
वित्तीय वर्ष में, सरकार ने पहले ही उर्वरक सब्सिडी को दो बार बढ़ा दिया हैं और बजटीय समर्थन को लगभग ४३४.३० अरब रूपए बढ़ाया गया हैं। अधिकारयों ने मीडिया को सूचित किया कि, “यह साल सबसे अधिक सब्सिडी भुगतान में से एक होने जा रहा है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमतें डीएपी निर्यात पर चीन द्वारा प्रतिबंध सहित विभिन्न कारणों से बढ़ी हैं। “