केंद्रीय बजट 2026: किसानों, कृषि और ग्रामीण विकास के लिए इसका असली मतलब

केंद्रीय बजट 2026: किसानों, कृषि और ग्रामीण विकास के लिए इसका असली मतलब

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केंद्रीय बजट 2026 ने भारत के किसानों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया पैदा की है। कागज़ पर देखें तो कृषि क्षेत्र को इस साल थोड़ा अतिरिक्त संसाधन मिला है। सरकार ने 2026–27 के लिए कुल कृषि बजट ₹1.30 लाख करोड़ रखा है, जो पिछले साल से थोड़ा अधिक है। उर्वरक सहायता ₹1.70 लाख करोड़ से ऊपर पहुंच चुकी है, और खाद्य सब्सिडी आज भी देश का सबसे बड़ा ग्रामीण सुरक्षा कवच है।

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लेकिन केवल आंकड़े पूरी कहानी नहीं बताते। असली सवाल यह है: यह बजट किसानों, ट्रैक्टर मालिकों और ग्रामीण मजदूरों की रोज़मर्रा की जिंदगी को कितना बदलेगा?

आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।

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छोटा इज़ाफा, बड़ी उम्मीदें

कृषि क्षेत्र के लिए लगभग ₹3,000 करोड़ की बढ़ोतरी की गई है, जो करीब 2.6% की वृद्धि है। सुनने में यह बढ़ोतरी अच्छी लगती है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार महंगाई, जलवायु बदलाव और बढ़ती लागत को देखते हुए यह काफी सीमित है।

आज किसान बीज, खाद, डीज़ल, मजदूरी और मशीनरी पर पहले से ज्यादा खर्च कर रहे हैं। ऐसे में थोड़ी सी बढ़ोतरी को कई अलग-अलग जरूरतों — सिंचाई, अनुसंधान, बीमा और आय सहायता — में बांटना पड़ता है। इसलिए किसान संगठनों का मानना है कि कृषि को ज्यादा मजबूत समर्थन चाहिए।

फिर भी, बजट में कुछ लक्षित निवेश हैं जो सही तरीके से लागू होने पर बदलाव ला सकते हैं।

आय सहायता योजना जारी

सरकार ने किसानों की आय सहायता योजना के लिए ₹63,500 करोड़ का प्रावधान जारी रखा है। यह छोटी जोत वाले किसानों के लिए एक सुरक्षा जाल जैसा है। राशि नहीं बढ़ी, लेकिन स्थिरता बनी हुई है।

कई परिवारों के लिए यह रकम बीज, खाद और घर के जरूरी खर्च में मदद करती है। यह हर समस्या का हल नहीं है, लेकिन अचानक आर्थिक झटका लगने से बचाती है।

किसान अक्सर कहते हैं — पक्का सहारा, अधूरे वादों से बेहतर होता है।

खाद और इनपुट पर राहत

उर्वरक बजट बढ़कर ₹1.70 लाख करोड़ हो गया है, यानी लगभग 8.5% की बढ़ोतरी। खाद की कीमत सीधे खेती के मुनाफे को प्रभावित करती है। अगर सब्सिडी कम हो जाए, तो खेती की लागत तेजी से बढ़ जाएगी।

सरकार ने सब्सिडी बनाए रखकर किसानों के खर्च को नियंत्रित करने की कोशिश की है। यह खासकर गेहूं, चावल, गन्ना और कपास उगाने वाले किसानों के लिए अहम है।

कम लागत का मतलब है किसान उत्पादन पर ध्यान दे सकेंगे।

तकनीक की ओर कदम: AI आधारित खेती

बजट 2026 में ₹150 करोड़ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कृषि प्लेटफॉर्म के लिए रखे गए हैं। यह डिजिटल सिस्टम किसानों को मौसम, मिट्टी, कीट नियंत्रण और फसल योजना की सलाह देगा।

तकनीक से अनुमान लगाने की जगह सही जानकारी मिलेगी। डिजिटल सलाह लेने वाले किसान सिंचाई और कटाई का सही समय चुन सकते हैं।

सरल शब्दों में — सही सलाह, ज्यादा कमाई।

ट्रैक्टर और मशीनरी पर असर

हालांकि बजट में किसी खास ट्रैक्टर ब्रांड का नाम नहीं है, लेकिन कृषि ऋण और मशीनीकरण समर्थन बढ़ने से ट्रैक्टर खरीद पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

आसान कर्ज मिलने से किसान निवेश करते हैं:

  • ट्रैक्टर
  • हार्वेस्टर
  • सीड ड्रिल
  • रोटावेटर
  • सिंचाई पंप

मशीनीकरण से मजदूरी कम लगती है और काम तेजी से होता है। इससे गांवों में मरम्मत और सर्विसिंग का रोजगार भी बढ़ता है।

अब मशीनीकरण विलासिता नहीं, बल्कि जरूरत बन चुका है।

उपकरण और ग्रामीण ढांचा

सरकार ने भंडारण, कोल्ड स्टोरेज और परिवहन ढांचे पर खर्च बढ़ाया है। इससे फसल खराब होने का नुकसान कम होगा और किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी।

साथ ही ₹350 करोड़ की योजना के तहत नारियल, काजू और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे किसान नई और लाभदायक खेती की ओर बढ़ सकते हैं।

फसल विविधीकरण से जोखिम कम होता है और आय के नए रास्ते खुलते हैं।

अनुसंधान बजट पर चिंता

हालांकि कुल खर्च बढ़ा है, लेकिन कृषि अनुसंधान के लिए आवंटन थोड़ा कम हुआ है। विशेषज्ञों को डर है कि इससे बीज विकास और जलवायु अनुकूल तकनीक धीमी पड़ सकती है।

अनुसंधान भविष्य की खेती की नींव है। विज्ञान में निवेश कम होने से लंबे समय में उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

किसानों की प्रतिक्रिया

कई किसान संगठनों ने निराशा जताई है। उनकी मुख्य मांगें हैं:

  • MSP की कानूनी गारंटी
  • कर्ज राहत
  • सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए सहायता
  • जलवायु जोखिम पर ठोस योजना

किसान विलासिता नहीं चाहते — उन्हें सुरक्षा चाहिए।

क्या बदल सकता है

फिर भी बजट से कुछ सुधार संभव हैं:

  • सस्ती खेती लागत
  • आसान मशीनरी लोन
  • डिजिटल सलाह
  • बेहतर ढांचा
  • फसल विविधीकरण

सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि पैसा जमीन तक कितनी तेजी से पहुंचता है।

कृषि बजट सिर्फ आंकड़ों का हिसाब नहीं है। यह दिखाता है कि देश अपने किसानों को कितना महत्व देता है। बजट 2026 उम्मीद देता है — लेकिन यह बड़ा परिवर्तन नहीं, बल्कि छोटा कदम है।

अंतिम विचार

जब नीति सीधे खेत तक पहुंचेगी, तभी असली प्रगति होगी। भारत की खेती का भविष्य सिर्फ रकम से नहीं, बल्कि उस रकम के असर से तय होगा।

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