Sonalika Tractor Sales Up 20.7 Percent in December 2019

Published on 8 January, 2020

Sonalika Tractor Sales Up 20.7 Percent in December 2019

Farm Mechanization in India mostly depends upon the farmer’s special hero, ‘tractor’. There are numerous tractor manufacturers in India. They are evaluating their account monthly and announced their monthly tractor sale report. The most important tractor manufacturers in India are Mahindra Tractor, Escorts Tractor, Tafe Tractor, Sonalika Tractor, etc. Here we are going to discuss India’s most famous tractor brand, ‘Sonalika International Tractors’

Sonalika International Tractors recorded a 20.7 percent increase in total sales in December 2019 with 7,320 units. The company also recorded an overall market share of 14.7 percent. The domestic tractor manufacturer sold 6,066 units in the same month last year. The company registered a growth of 132.5 percent by shipping 2,358 units, registering a market share of 32 percent in the month under review. Speaking on the development trajectory, Sonalika Group Executive Director, Raman Mittal said, "20.7% volume growth with the overall market share of 14.7 percent, our strong foundation of improvement in consumer sentiment and market activity is indicative. "With the start of the new year, we see positive consumer demand and the start of the industry, which is behind the increasing alternative use of tractors.

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Pradhan Mantri Kisan Urja Suraksha Evam Utthan Mahabhiyan For Farmers by The Central Government

Published on 7 January, 2020

Pradhan Mantri Kisan Urja Suraksha Evam Utthan Mahabhiyan For Farmers by The Central Government

union and state governments are attempting and embracing each conceivable method to satisfy Prime Minister Modi's vision of multiplying farmer’s income by 2022. In this arrangement, the Modi government has as of late begun the Farmer Energy Security and Pradhan Mantri Kisan Urja Suraksha evam Utthan Mahabhiyan (PM KUSUM), remembering the territories of the nation which has been confronting the electricity issue since decades. Additionally, Kusum Yojana, which was declared by previous Finance Minister Arun Jaitley during the Union Budget 2018-19, is good to go running diesel/electric siphons utilized for water system the nation over with sun powered vitality. Service of New and Renewable Energy (MNRE) has propelled the Pradhan Mantri Kisan Urja Suraksha evam Utthan Mahabhiyan (PM KUSUM) Scheme for Farmers for establishment of Solar based siphons and network associated solar powered and other inexhaustible force plants in the nation. The plan intends to include Solar powered and another inexhaustible limit of 25,750 MW by 2022 with the absolute focal money related help of Rs. 34,422 Crore including administration charges to the executing offices. The plan will open a steady and persistent wellspring of salary to the provincial landowners for a time of 25 years by use of their dry/uncultivable land. Further, if developed fields are picked for setting up sun-oriented power extends, the farmers could keep on developing yields as the solar oriented boards are to be set up over a base tallness. The Kusum plan can profit the farmers in two different ways. Right off the bat, they will get free power for water system and furthermore on the off chance that they make extra power and send it to the lattice, at that point they will likewise get their salary. Aside from this, farmers should pay just 10% of the sum for introducing solar-powered vitality hardware. The rest of the sum will be given as an appropriation in the ledger by the union government to the farmers.

Under Kusum Yojana, banks will give a 30% sum as advances to farmers. So simultaneously, the administration will give 60% of the all-out expense of the sunlight-based siphons as an endowment to the farmers. It is to be noticed that, solitary water system siphons of farmers will be remembered for the principal period of Kusum Yojana which is at present running with diesel. As indicated by a gauge of the administration, courses of action will be made to run 17.5 lakh such water system siphons with sun-based vitality. This will help in checking diesel utilization and unrefined petroleum imports. Under this yojana, the union government will disperse 27.5 lakh solar pumps liberated from cost the nation over. The principle intention behind the Kusum which has begun in July 2019 is to spare the electrical force and fuel. On the off chance that sun oriented vitality is utilized in all water system siphons of the nation, at that point the power can be spared, yet it will also be conceivable to deliver 28 thousand MW extra powers.

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केंद्र सरकार द्वारा किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान

Published on 7 January, 2020

केंद्र सरकार द्वारा किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान

केंद्र और राज्य सरकारें 2022 तक किसान की आय दोगुनी करने के प्रधानमंत्री मोदी के सपने को पूरा करने के लिए हर संभव तरीके अपना रही हैं। इस श्रृंखला में, मोदी सरकार ने हाल ही में किसान ऊर्जा सुरक्षा और प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा  सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम कुसुम) शुरू किया है। देश के उन क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए जो दशकों से बिजली की समस्या का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा, कुसुम योजना, जिसकी घोषणा पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने केंद्रीय बजट 2018-19 के दौरान की थी, देश भर में सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाले डीजल / इलेक्ट्रिक पंपों को सौर ऊर्जा से चलाने के लिए तैयार है।नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने देश में सौर पंप और ग्रिड से जुड़े सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सुरक्षा उत्थान महाभियान (पीएम कुसुम) योजना शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य 2022 तक सौर और अन्य नवीकरणीय क्षमता को 25,750 मेगावाट की कुल केंद्रीय वित्तीय सहायता के साथ जोड़ना है।यह योजना ग्रामीण भूस्वामियों के लिए 25 वर्ष की अवधि के लिए उनकी सूखी / गैर-उपयोगी भूमि का उपयोग करके आय का एक स्थिर और निरंतर स्रोत खोलेगी। इसके अलावा, अगर सौर ऊर्जा परियोजनाओं को स्थापित करने के लिए खेती योग्य खेतों को चुना जाता है, तो किसान फसलों को उगा सकते हैं क्योंकि सौर पैनलों को न्यूनतम ऊंचाई से ऊपर स्थापित किया जाता है | कुसुम योजना से किसानों को दो तरह से लाभ मिल सकता है। सबसे पहले, उन्हें सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली मिलेगी और दूसरी अगर वे अतिरिक्त बिजली बनाते हैं और इसे ग्रिड में भेजते हैं, तो उन्हें अपनी आय भी मिलेगी।इसके अलावा, किसानों को सौर ऊर्जा उपकरण स्थापित करने के लिए केवल 10% राशि का भुगतान करना होगा। शेष राशि केंद्र सरकार द्वारा किसानों को बैंक खाते में सब्सिडी के रूप में दी जाएगी।कुसुम योजना के तहत, बैंक किसानों को ऋण के रूप में 30% राशि देंगे। तो वहीं, सरकार सोलर पंप की कुल लागत का 60% किसानों को सब्सिडी के रूप में देगी।

 

यह ध्यान दिया जाना है कि, किसानों के केवल सिंचाई पंपों को कुसुम योजना के पहले चरण में शामिल किया जाएगा जो वर्तमान में डीजल के साथ चल रहा है। सरकार के एक अनुमान के मुताबिक, 17.5 लाख ऐसे सिंचाई पंपों को सौर ऊर्जा से चलाने की व्यवस्था की जाएगी। इससे डीजल की खपत और कच्चे तेल के आयात पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।इस योजना के तहत, केंद्र सरकार पूरे देश में 27.5 लाख सोलर पंप मुफ्त में वितरित करेगी। कुसुम योजना के पीछे मुख्य उद्देश्य जो जुलाई 2019 में शुरू हुआ है, विद्युत शक्ति और ईंधन को बचाना है। अगर देश के सभी सिंचाई पंपों में सौर ऊर्जा का उपयोग किया जाता है, तो न केवल बिजली की बचत की जा सकती है, बल्कि 28 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली का उत्पादन भी संभव होगा।

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8 राज्यों द्वारा कृषि निर्यात नीति कार्य योजना को अंतिम रूप

Published on 7 January, 2020

8 राज्यों द्वारा कृषि निर्यात नीति कार्य योजना को अंतिम रूप

सरकार ने कहा कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पंजाब और कर्नाटक सहित आठ राज्यों में कृषि निर्यात नीति के लिए अंतिम रूप से कार्य योजना है, जिसका उद्देश्य ऐसे निर्यात को दोगुना करना है।“कृषि निर्यात नीति की घोषणा पिछले साल निर्यात को दोगुना करने और किसानों की आय को दोगुना करने के उद्देश्य से की गई थी। कई राज्यों ने नोडल एजेंसियों और नोडल अधिकारियों को नामित किया है।वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "पंजाब और कर्नाटक ने राज्य कार्य योजना को अंतिम रूप दिया है और अन्य राज्य कार्य योजना को अंतिम रूप देने के विभिन्न चरणों में हैं।"कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) कृषि निर्यात नीति (AEP) के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्य सरकारों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक केंद्रित दृष्टिकोण अपना रहा है।पूरे वर्ष के दौरान एपीडा ने राज्य सरकार के अधिकारियों और राज्य कार्य योजना की तैयारी के लिए अन्य हितधारकों के साथ बैठकों की एक श्रृंखला आयोजित की, जिसमें उत्पादन क्लस्टर, क्षमता निर्माण, बुनियादी ढांचे और रसद जैसे सभी आवश्यक घटक शामिल थे, और एईपी के कार्यान्वयन के लिए अनुसंधान और विकास और बजट आवश्यकताएं शामिल थीं|

 

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, पशुपालन और डेयरी विभाग, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय और अन्य एजेंसियों के साथ निर्यात बढ़ाने और व्यापार में मौजूदा अड़चनों को दूर करने के लिए रणनीति तैयार करने के लिए इनपुट मांगने के लिए कई दौर की चर्चा हुई।कई राज्यों में राज्य स्तरीय निगरानी समितियों का गठन किया गया है। इसमें क्लस्टर के लिए एपीडा के नोडल अधिकारियों द्वारा क्लस्टर का दौरा किया गया है।एईपी के तहत अधिसूचित क्लस्टर में क्लस्टर विकास के लिए रोडमैप क्लस्टर यात्राओं के दौरान पहचाने गए हस्तक्षेपों को संबोधित करने के लिए तैयार किया गया था।बयान में कहा गया है, "एपीडा द्वारा क्लस्टर यात्राओं के परिणामस्वरूप, राज्यों में क्लस्टर स्तर की समिति का गठन किया गया है। पंजाब में आलू, राजस्थान में ईसबगोल, महाराष्ट्र में अनार, नारंगी और अंगूर और तमिलनाडु में केला है।"एपीडा ने पूरे वर्ष में एईपी के कार्यान्वयन के लिए कई संगोष्ठियों और बैठकों का आयोजन किया।AEP में सक्रिय भूमिका के लिए सहकारी समितियों को शामिल करने के लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और किसान निर्माता कंपनियों को निर्यातकों के साथ बातचीत करने के लिए एक मंच प्रदान करने के लिए एपीडा द्वारा एक किसान कनेक्ट पोर्टल भी स्थापित किया गया है।पोर्टल पर 800 से अधिक एफपीओ पंजीकृत किए गए हैं।

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Finalization of Agricultural Export Policy Action Plan By 8 States

Published on 7 January, 2020

Finalization of Agricultural Export Policy Action Plan By 8 States

The legislature said eight states, including Maharashtra, Uttar Pradesh, Punjab, and Karnataka, have concluded activity plan for agriculture export policy which means to double such exports. "The Agri Export Policy was reported a year ago with a target of multiplying the fare and guaranteeing to multiply of farmer' income. Many states have named nodal offices and nodal officials. Maharashtra, Uttar Pradesh, Kerala, Nagaland, Tamil Nadu, Assam, Punjab, and Karnataka have finished the State Action Plan and different states are at various phases of the conclusion of the activity plan," the Ministry of Commerce and Industry said in an announcement. The Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority (APEDA) has been receiving an engaged methodology for guaranteeing more noteworthy inclusion of the state governments for viable usage of the Agri Export Policy (AEP).

During the time APEDA held a progression of gatherings with state government authorities and different partners for the planning of state activity plan which incorporated every single fundamental segment like creation groups, limit building, framework and coordination, and innovative work and spending prerequisites for the usage of AEP, it said. A few rounds of discourses were held with the Ministry of Agriculture and Farmers' Welfare, Department of Animal Husbandry and Dairying, Ministry of Food Processing Industries and different organizations for looking for contributions for detailing a technique to expand fares and address the current bottlenecks in the exchange. State-level observing boards of trustees have been shaped in a significant number of the states. Bunch visits have been made by APEDA nodal officials to the item groups, it included. The guide for bunch advancement in the groups advised under AEP was set up to address the distinguished mediations during the bunch visits. "Because of group visits by APEDA, the bunch level council has been established in the states viz. potato in Punjab, isabgol in Rajasthan, pomegranate, orange and grapes in Maharashtra and banana in Tamil Nadu," the announcement said. APEDA sorted out various workshops and gatherings for the usage of AEP consistently. A Memorandum of Understanding was marked with the National Cooperative Development Corporation to incorporate co-agents for dynamic job in AEP. A Farmer Connect Portal has likewise been set up by APEDA on its site for giving a stage to Farmer Producer Organizations (FPOs) and Farmer Producer Companies to cooperate with exporters, it said. More than 800 FPOs have been enrolled on the gateway.

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Coconut Farming Affected Due to Whitefly in South India

Published on 23 January, 2020

Coconut Farming Affected Due to Whitefly in South India

Coconut farmers in and around Pollachi and Udumalpet districts in Coimbatore are frightened at a harmful whitefly hazard clearing the locale. The bug, which is just around 2 mm in size, has been tormenting coconut manors in the locale for more than two years now. Farmers express their interests to the State Agricultural Department and different experts for help have failed to attract anyone's attention. They clarified that the bugs sucked the coconut sap, benefited from the under-surfaces of the leaf and left stores of their sugary discharge. One of the ranchers stated, "This draws in ants, prompting organism development and affects plant development". "In excess of 75 percent of the trees (shorter assortments and half breeds) have been affected. The bug is comprehended to have influenced the mixture to overshadow trees generally and the tall trees and local species appear to have withstood the invasion. Farmers state they have enough water now, however, the whitefly threat and intense deficiency of farmhands made cultivating unviable. "This could be because of high obstruction of the local species, combined with the bugs' failure to fly higher than 30 feet to arrive at the leaves of the more established (tall) trees," as per a nearby farmer. T Sakthivel, Director, Vinayak Coconut Producer Company, said the farmers had occupied the issue over and over with the State government yet without much of any result. At any rate, 11% of the nation's coconut generation is from the Pollachi district. This belt has been longing for consideration for over 10 years. The Eriophid bug assault had constrained a few ranchers to forsake the trees around 2005-06. Many left their old neighborhood to squeeze out a living to reimburse their obligations. This was trailed by long stretches of dry spell. Although the rainstorm has been whimsical, the area recorded some great downpours during the last season. This, combined with water preservation activities by Marico under the aegis of Parachute Kalpavriksha Foundation, has begun to hold up under organic products.

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दक्षिणी भारत में व्हाइटफ्लाई के कारन नारियल की खेती प्रभावित

Published on 23 January, 2020

दक्षिणी भारत में व्हाइटफ्लाई के कारन नारियल की खेती प्रभावित

कोईमतुर  में और आस-पास के पोलाची और उदुमलपेट क्षेत्रों में नारियल किसानों को इस क्षेत्र में व्यापक रूप से फैलने वाले व्हाइटहिल मेनस में देखा जाता है, जो कि लगभग 2 मिमी आकार का है, इस क्षेत्र में अब दो साल से नारियल के बागान हैं। किसानों का कहना है कि मदद के लिए राज्य के कृषि विभाग और अन्य अधिकारियों से उनकी अपील को अनसुना कर दिया गया है।उन्होंने समझाया कि कीड़े ने नारियल का रस चूसा, पत्ती के नीचे की सतहों को खाया और उनके शर्करा के उत्सर्जन को छोड़ दिया। किसानों में से एक ने कहा, "यह चींटियों को आकर्षित करता है, जिससे कवक का गठन होता है और पौधे के विकास को प्रभावित करता है"।“75 प्रतिशत से अधिक पेड़ (छोटी किस्में और संकर) प्रभावित हुए हैं। समझा जाता है कि कीट ने बौने पेड़ों को अधिकांशतः प्रभावित किया है और ऊंचे पेड़ों और देशी प्रजातियों को देखकर लगता है कि वे घुसपैठ कर चुके हैं।किसानों का कहना है कि उनके पास अभी पर्याप्त पानी है, लेकिन व्हाइटफ्लाई  मेंज़ और फार्महैंड की तीव्र कमी ने खेती को बेकार बना दिया है।स्थानीय किसानों के अनुसार, "यह मूल प्रजातियों के उच्च प्रतिरोध के कारण हो सकता है, जो कि पुराने (ऊंचे) पेड़ों की पत्तियों तक पहुंचने के लिए कीड़ों की अक्षमता के साथ 30 फीट से अधिक ऊंची उड़ान भरने में असमर्थ है।"विनायक कोकोनट प्रोड्यूसर कंपनी के निदेशक टी सकथिवेल ने कहा कि किसानों ने राज्य सरकार के साथ समय-समय पर मुद्दा उठाया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।देश का कम से कम 11% नारियल उत्पादन पोलाची क्षेत्र से होता है। यह बेल्ट एक दशक से अधिक समय से ध्यान देने के लिए तरस रहा है। एरीओफिड घुन के हमले ने कई किसानों को 2005-06 के आसपास पेड़ों को छोड़ने के लिए मजबूर किया था। कई लोगों ने अपने कर्ज को चुकाने के लिए अपने घर शहर छोड़ दिया।इसके बाद वर्षों तक सूखा पड़ा। हालांकि मानसून अनिश्चित रहा है, इस क्षेत्र में पिछले सीजन के दौरान कुछ अच्छी बारिश दर्ज की गई। पैराशूट कल्पवृक्ष फाउंडेशन के तत्वावधान में मैरिको द्वारा जल संरक्षण पहलों के साथ मिलकर यह फल देने लगा है।

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Agriculture Plays an Important Role in Making India $ 5 Trillion Economy: PM Modi

Published on 4 January, 2020

Agriculture Plays an Important Role in Making India $ 5 Trillion Economy: PM Modi

The importance of agriculture in the Indian economy is high. Prime Minister Narendra Modi said that agriculture has an important role in helping the country achieve its goal of becoming a five trillion-dollar economy and the government is focusing on creating a cash crop and export-centric farming system. Distributed Krishi Karman Awards After addressing a gathering here, Modi said that with the efforts of the Central Government, the production of spices in the country Not to increased exports | Modi said that the production of spices has crossed 2.5 million tonnes and their exports have increased from Rs 15,000 crore to Rs 19,000 crore. The government is not only solving the problems of the farmers but is working towards a better future for them. We have arranged such that farmers can sell their produce in any e-mandi across the country through e-NAM network. We have also provided facilities for cold storage. The government has started a vaccination program for cattle. The Prime Minister also talked about the efforts being made by the Center to address the special issues of farmers producing crops like coconut, cashew, rubber, and coffee. Said that the government is working on three levels to strengthen fisheries - promoting fisheries in villages with financial support, blue revolution or Modernization of boats and construction of fishing infrastructure under the scheme.

Khetigaadi is also trying to boost Indian agricultural production. Increasing the income of Indian farmers along with agricultural mechanization is our prime objective. Stay connected with Khetigaadi for more information related to agriculture and agricultural mechanization.

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भारत को $ 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका: पीएम मोदी

Published on 4 January, 2020

भारत को $ 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका: पीएम मोदी

भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्व अधिक है |  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है और सरकार एक नकदी फसल और निर्यात केंद्रित कृषि प्रणाली तैयार करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।कृषि कर्मण पुरस्कारों को वितरित करने के बाद यहां एक सभा को संबोधित करते हुए, मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार के प्रयास से देश में मसालों के उत्पादन और निर्यात में वृद्धि हुई है| मोदी ने कहा कि मसालों का उत्पादन 25 लाख टन को पार कर गया है और उनका निर्यात 15,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 19,000 करोड़ रुपये हो गया है। सरकार न केवल किसानों की समस्याओं का समाधान कर रही है, बल्कि उनके लिए बेहतर भविष्य की दिशा में काम कर रही है। हमने ऐसी व्यवस्था की है कि किसान ई-एनएएम नेटवर्क के माध्यम से देश भर में किसी भी ई-मंडी में अपनी उपज बेच सकें। हमने कोल्ड स्टोरेज के लिए भी सुविधाएं दी हैं|  सरकार ने मवेशियों के लिए टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया है।प्रधानमंत्री ने केंद्र द्वारा नारियल, काजू, रबर और कॉफी जैसी फसलों का उत्पादन करने वाले किसानों के विशेष मुद्दों को हल करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में भी बात की।मोदी ने कहा कि सरकार मछली पालन को मजबूत करने के लिए तीन स्तरों पर काम कर रही है - वित्तीय सहायता के साथ गांवों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देना, नीली क्रांति योजना के तहत नौकाओं का आधुनिकीकरण और मछली पकड़ने के बुनियादी ढांचे का निर्माण।

भारतीय कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए खेतिगाडी भी एक प्रयास कर रही है | कृषि मशीनीकरण के साथ भारतीय किसानों की आय बढ़ाना हमारा प्रमुख उद्देश्य है | कृषि और कृषि मशीनरीकरण संबधित अधिक जानकारी के लिए जुड़े रहे खेतिगाडी के साथ |

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Government Will Release the Third Installment of PM-Kisan From January 2

Published on 2 January, 2020

Government Will Release the Third Installment of PM-Kisan From January 2

Prime Minister Narendra Modi will release the much-awaited third installment of Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi Scheme from December 2019 to March 2020 in Karnataka from January 2, 2020. It is said that more than 6 crore farmers in India get the benefit of PM-Kisan Yojana. PM Modi, who is currently on a 2-day visit to Karnataka, is officially giving Krishi Karman Award to farmers in Tumkur. Disbursement of the third installment of the scheme will be announced. The Prime Minister will also distribute Kisan Credit Cards to farmers from Karnataka. Apart from this, some fishermen from Tamil Nadu will also get the key to advanced ships for deep sea fishing from PM Modi. The beneficiaries of Pradhan Mantri Kisan Nidhi Yojana from various states as well as Union Territories will receive the award from PM Modi. Under the PM-Kisan scheme, farmers will get an annual amount of Rs 6,000 in three installments of Rs 2,000. The Modi government launched the Minimum Income Assistance Scheme ahead of the Lok Sabha elections in 2019, with an aim to double farmer income in 2019. PM-Kisan aims to transfer Rs 75,000 crore with 12 crore farmers across India in 3 years.

The amount will directly reach the beneficiary's account and information about the disbursement of the money will also be sent through SMS (on the registered mobile number). Therefore, farmers should ensure that they have submitted their correct mobile numbers. Farmers can avail the PM Kisan Yojana by applying online. The website also has many other details like beneficiary list and beneficiary status. So, you can get all the necessary information related to PM-Kisan there.

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